भारत, विभिन्न प्रकार के अनाज और बाजरे की प्रजाति के खाद्यान्नों का सबसे बड़ा उत्पादक है लेकिन भारत के सबसे समृद्ध घरों में प्रमुख भोजन केवल चावल और गेहूं है. अन्य अनाज और दानेदार भोजन, स्वास्थ्य संबंधी बहुत से लाभ प्रदान करते हैं और उन्हें नियमित रूप से ग्रहण करने से भारतीय लोगों को बढ़ती डायबिटीज़ और हृदय की बीमारियों से मुकाबला करने में सहायता मिल सकती है!

यहां खाद्यान्नों की एक सूची दी गई है, जिसमें उनके स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी और उन्हें अपने आहार में शामिल करने का तरीका दिया गया है

ओट्स                

ओट्स के स्वास्थ्यसंबंधी बहुत से लाभ अच्छी तरह ज्ञात हैं. ओट्स से इनमें सहायता मिलती है

  • LDL (बुराकोलेस्ट्रॉल को कम करना और हृदय रोग का जोखिम कम करना
  • व्यक्ति का पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे वज़न को कम करने में मदद मिलती है
  • रक्तचाप को कम करना
  • टाइप 2 डायबिटीज़ का जोखिम कम करना
  • कब्ज़ से राहत देना
  • बच्चों में अस्थमा के जोखिम को कम करना
  • ओट्स में अन्य अधिकांश अनाजों की तुलना में प्रोटीन और स्वास्थ्यवर्धक वसा अधिक मात्रा में होती है और कार्बोहाइड्रेट्स कम होता है.
  • उनमें एवनॉनथ्रामाइड्स नामक 20 से अधिक अद्वितीय पोलीफ़ेनॉल होते हैं, जिनमें सशक्त एंटीऑक्सिडेंट्स, एंटीइन्फ़्लेमेटरी और एंटीइचिंग सक्रियता होती है
  • ओट्स में बीटाग्लूकेंस अधिक मात्रा में होता है, जो इम्युन सिस्टम (रोगप्रतिरोधक प्रणाली) को उत्प्रेरित करने और ट्यूमर को रोकने वाला एक प्रकार का स्टार्च है

इंस्टंट ओट्स, जो 3-5 मिनटों में पक जाता है (यह प्रकार भारत में सबसे आसानी से उपलब्ध है), उसमें भी कैलोरी मान वैसा ही होता है लेकिन इसका ग्लाइसिमिक इंडेक्स, प्राकृतिक ओट्स (स्टील से काटा गया और रोल किया गया ओट्स) की तुलना में अधिक होता है. प्राकृतिक ओट्स को पकाने में 15-20 मिनट लगते हैं और इसका ग्लाइसिमिक इंडेक्स कम होता है और यह डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बेहतर होता है

कभीकभी डायबिटीज़ के मरीज़ों को इंस्टंट ओट्स के अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण इसे ग्रहण नहीं करने की सलाह दी जाती है, लेकिन डायबिटीज़ के ऐसे मरीज़ों को, जिन्हें उच्च कोलेस्ट्रॉल या BP हो, ओट्स (इंस्टंट या प्राकृतिक) से लाभ होगा.

चेतावनी: बाजार में विक्रय के लिए उपलब्ध रेडी-टू-कुक (पकाने के लिए तैयार) ओट्स के अलग-अलग फ़्लेवर में अक्सर अतिरिक्त नमक, शुगर और अस्वास्थ्यवर्धक वसाएं होती हैं. उन्हें नियमित रूप से ग्रहण करने से बचें, इसके बजाय अपने स्वयं के ओट्स व्यंजन बनाएं

बार्ले (हिंदी में जौ)

जौ को ग्रहण करने के दो तरीके हैं. चोकरयुक्त संपूर्ण जौ और जौ का दलिया, जो चोकर रहित जौ का एक प्रकार है. अनाजों के बीच जौ अद्वितीय है क्योंकि जौ की दलिया में भी फ़ायबर की अत्यधिक मात्रा होती है.

सभी अनाजों के बीच चोकरयुक्त संपूर्ण जौ में सबसे अधिक मात्रा में फ़ायबर होता है (क्रमशः भूरे चावल और ओट्स में पाए जाने वाले 3.5% और 10% की तुलना में 16-17%)  इसके अतिरिक्त, इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और मिनरल्स अधिक मात्रा में होते हैं

हाल ही में हुए बहुत से शोध बताते हैं कि जौ में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने की असाधारण क्षमता हो सकती है, जिससे भारतीयों में मधुमेह की बढ़ती दर को रोकने के लिए यह एक महत्वपूर्ण साधन प्रदान कर रहा है

अपने जौ को बड़ी मात्रा में पकाएं (50-60 मिनट तक पानी में उबालें) और इसे फ्रिज में ठंडा करें. आप इसे बाद में सूप में मिला सकते हैं या जौ पुलाव/दलिया इत्यादि बना सकते हैं

मिलतेजुलते अनाज

ये अनाज नहीं होते हैं, बल्कि इन्हें उनकी तरह ग्रहण किया जाता है. इन्हें व्रत‘/ उपवास के दौरान ग्रहण किया जा सकता है और विशेष रूप से ये उन लोगों के लिए लाभकारी होते हैं, जिन्हें वज़न की समस्या होती है

  • एमरांथ (राजगिरा/राम दाना)

इसमें सामान्य अनाज की तुलना में अधिक प्रोटीन होता है और इसकी प्रोटीन प्रोफ़ाइल बेहतर होती है (इसमें लायसीन होता है, जो कि आम अनाज में कम मिलने वाला एक अत्यावश्यक एमिनो अम्ल है) और इसमें हृदय के लिए सुरक्षात्मक गुण (कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसरॉइड्स को कम करता है) होते हैं

आप एमरांथ को पोरिज या पुलाव के रूप में ग्रहण कर सकते हैं और उसे चावल के समान ही पका सकते हैं

  • क्विनोआ

इसमें लगभग सभी अनाजों की तुलना में प्रोटीन का अधिक अंश होता है और यह ऐसी बहुत कम भोज्य वनस्पतियों में से एक है, जिसमें संतुलित मात्रा में आवश्यक सभी एमिनो अम्ल  प्रदान करने वाला संपूर्ण प्रोटीन होता है. साथ ही इसमें विशेष रूप से क्वेरसेटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट बड़ी मात्रा में होते हैं

क्विनोआ को भी चावल के समान पानी को उबालकर बनाया जाता है और इसे पकाने में 15-20 मिनट लगते हैं, लेकिन इसका कड़वा स्वाद दूर करने के लिए इसे उबालने के बाद पूरी तरह धोना पड़ता है.

  • बकव्हीट/कुट्टू

इसमें अत्यधिक घुलनशील फाइबर होता है जो ग्लूकोज अवशोषण की दर को धीमा करने में मदद करता है और यह प्रतिरोधी स्टार्च का संभावित स्रोत होता है, जो स्टार्च का एक ऐसा प्रकार है जो कोलोन के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकता है

बकव्हीट अत्यधिक मात्रा में पूर्ण रूप से संतुलित प्रोटीन भी प्रदान करता है, जिसमें लाइसीन अत्यधिक मात्रा में होता है.

बकव्हीट में अन्य दानेदार अनाज की तुलना में ज़िंक, तांबा और मैंगनीज़ की अधिक मात्रा होती है और ये भी बेहतर रूप से अवशोषित होते हैं.

  • फ़ूल मखाना

मखाना (फ़ॉक्सनट) बड़े वाटर लिली पौधे का बीज है. लोगों में इससे कमल के बीजों का भ्रम उत्पन्न होता है, जो चीन में आमतौर पर मिलते हैं. ये दोनों पोषण के अच्छे विकल्प हैं.

मखाना में 10 ग्राम प्रोटीन/100 ग्राम,  अधिक पोटैशियम, पर्याप्त मैग्निशियम और लौह तत्व होते हैं. एक कप मखाना का वज़न केवल 20 ग्राम होता है और यह केवल 70 कैलोरी प्रदान करता है, इसलिए मखाना, स्नैक का अच्छा विकल्प है

आयुर्वेद में मखाना के विभिन्न स्वास्थ्य लाभ बताए गए हैं: यह एंटी डायरिया, किडनी के लिए सुरक्षात्मक, स्प्लीन की क्रिया को बढ़ाने वाला, एंटाइन्फ्लामेटरी (शोथरोधी), हृदय के लिए सुरक्षात्मक गुणों वाला इत्यादि होता है.

बाजरा

बाजरा मोटा अनाज है, जिसे भारत का अपेक्षाकृत कम समृद्ध वर्ग चावल या गेहूं के स्थान पर ग्रहण करता है. इनमें चावल की तुलना में अधिक प्रोटीन, मैग्निशियम, एंटीऑक्सिडेंट्स और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है.

गेहूं से तुलना करने पर ये उतने महंगे नहीं हैं; उनमें प्रोटीन की मात्रा गेहूं से कम है और शेष लाभ लगभग समान हैं. हालांकि बाजरा ग्लूटेनफ्री होता है और जिन लोगों को ग्लूटेन के प्रति संवेदनशीलता होती है उनके लिए गेहूं का अच्छा विकल्प है

रागी या फ़िंगर मिलेट, इससे अलग है, क्योंकि इसमें कैल्शियम की बहुत अधिक मात्रा होती है और यह डायबिटीज़ के लिए अत्यंत लाभदायक होता है

सामान्य बाजरा की एक सूची यहां दी गई है

  • पर्ल मिलेट बाजरा
  • फ़िंगर मिलेट रागी
  • सॉरघम ज्वार (इसे कुछ लोगों द्वारा मिलेट माना जाता है और अन्य लोगों द्वारा इसे अनाज माना जाता है)
  • फ़ॉक्सटेल मिलेट कांगी (हिंदी), नवाने (कन्नड़), थिनाई (तमिल), कांग (गुजराती), राला (मराठी)

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