डायबिटीज़ मेलिटस की जटिलताएँ क्या हैं?

डायबिटीज़ के प्रभाव शरीर की लगभग सभी प्रणालियों में दिखाई देते हैं . यदि डायबिटीज़ को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो इसके परिणामस्वरूप हृदय रोग, किडनी की खराबी, दृष्टि खो सकती है, पैर समाप्त हो सकता है. लेकिन डायबिटीज़ के इन प्रभावों का कारण क्या है?

जैसा कि आप जानते हैं, डायबिटीज़ में रक्त शर्करा के स्तर, सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होते हैं. अतिरिक्त रक्त शर्करा डायबिटीज़ के मरीज़ की रक्त वाहिनियों में जमा हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप रक्तवाहिनियों की असामान्यताओं से संबंधित दो प्रकार की जटिलताएं होती हैं

माइक्रोवेस्क्युलर जटिलताएं:

ये जटिलताएं, छोटी रक्त वाहिकाओं में असामान्यताओं के कारण होती हैं. ये इस प्रकार हैं:

  1. आंखों/दृष्टि को प्रभावित करने वाली डायबिटिक रेटिनोपैथी: अध्ययनों में बताया गया है कि प्रकार 2 की डायबिटीज़ होने के 20 वर्ष बाद भी 60% मरीज़ों में रेटिनोपैथी विकसित हो गई.  रेटिनोपैथी के प्रोलिफ़रेटिव स्वरूप (अधिक गंभीर) के परिणामस्वरूप दृष्टि खो सकती है, जो कि अंधत्व का एक सामान्य कारण है.
  2. किडनी को प्रभावित करने वाली डायबिटिक नेफ़्रोपैथीयह भारतीय लोगों में किडनी की अंतिम स्तर की बीमारी है. डायबिटीज़ के ऐसे मरीज़ जिनमें उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल भी होता है या जो धूम्रपान भी करते हैं, उन्हें डायबिटिक नेफ़्रोपैथी होने की संभावना अधिक होती है. शुरू में, मूत्र में एल्ब्युमिन की कम मात्रा होती है, जिसे अनुपचारित छोड़ देने पर इसके परिणामस्वरूप 20-40% लोगों में किडनी खराब हो जाती है
  3. हृदय की नाड़ियों, गेस्ट्रोइंटेस्टिनल प्रणाली, जेनिटोयूरिनरी प्रणाली और पैरों की नाड़ियों को प्रभावित करने वाली डायबिटिक न्युरोपैथी भारत में अक्सर डायबिटीज़ प्रकार 2 का पहला लक्षण होता है.
    • पेरिफ़ेरल न्युरोपैथी, के परिणामस्वरूप डायबेटिक फ़ुटविकसित हो जाता है, जिसमें पैरों में संवेदना और रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है. इसलिए, मरीज़ आघात महसूस नहीं कर सकता है और उसे घाव व अल्सर उत्पन्न हो जाते हैं, जिनमें संक्रमण हो जाता है और इससे गैंगरीन हो सकता है. डायबिटिक भोजन, एम्प्युटेशन का आम कारण है
    • डायबिटिक न्यूरोपैथी के अन्य लक्षण इरेक्टाइल की खराबी, कब्ज़, पूरी तरह भरा होने का अनुभव, बारबार पेशाब आना इत्यादि है

मैक्रोवेस्क्युलर जटिलताएं या  CVD (कार्डियोवेस्क्युलर रोग):

यह ह्रदय को आपूर्ति करने वाली रक्तवाहिनियों सहित बड़ी रक्त वाहिनियों में असामान्यताओं के कारण होता है. इनमें, इस्केमिक ह्रदय रोग (IHD या CHD),कैरोटिड आर्टरी रोग (CAD), पैरिफ़ेरल आर्टरी रोग (PAD) और उनकी जटिलताएं जैसे MI या ह्रदयाघात, स्ट्रोक, पैरों का गैंगरीन इत्यादि होता है.

डायबिटिक मरीज़ों में CVD मृत्यु का एक प्रमुख कारण है और इसे हृदयरोगियों के लिए बहुत अधिक जोखिमउत्पन्न करने वाला माना जाता है

रक्त शर्करा के अच्छे नियंत्रण से डायबिटीज़ की इन जटिलताओं से बचने में कैसे मदद मिलती है?

बहुत से अध्ययनों में प्रकार 1 और प्रकार 2 की डायबिटीज़ में होने वाली इन जटिलताओं में रक्त शर्करा के अच्छे नियंत्रण के प्रभावों को देखा गया. इनमें से कुछ इस प्रकार हैं

  • प्रकार 1 डायबिटीज़ वाले रोगियों में डायबिटीज़ नियंत्रण और जटिलताओं का परीक्षण‘ (DCCT)
  • डायबिटीज़ रोकथाम और जटिलताओं की एपिडेमियोलॉजी‘ (EDIC) अध्ययन, DCCT अध्ययन के मरीज़ों पर एक फ़ॉलोअप अध्ययन
  • UK दृष्टिकोण डायबिटीज़ अध्ययन (UKPDS)
  • कुमामोटो अध्ययन
  • डायबिटीज़ में कार्डियोवेस्क्युलर जोखिम का नियंत्रण करने की कार्रवाई‘ (ACCORD) अध्ययन,
  • डायबिटीज़ और वेस्क्युलर रोग में कार्रवाई: प्रीटेरेक्स और डायमिक्रॉन MR नियंत्रित मूल्यांकन‘ [ADVANCE], और
  • वेटेरन अफ़ेयर्स डायबिटीज़ परीक्षण‘ (VADT)

इन अध्ययनों के परिणाम नीचे सारांशित किए गए हैं:

माइक्रोवेस्क्युलर जटिलताएं:

  1. DCCT अध्ययन में यह पाया गया कि उन लोगों में, जिनकी रक्त शर्करा का कड़ा नियंत्रण रखा गया था, मानक उपचार वाले मरीज़ों की तुलना में कम जटिलताएं विकसित हुईं
  • कड़े नियंत्रण वाले समूह के कई लोगों में केवल एक चौथाई लोगों में डायबिटिक नेत्र रोग शुरू हुआ
  • किडनी रोग की शुरुआत केवल आधे लोगों में हुई
  • नाड़ी रोग की शुरुआत केवल एक तिहाई लोगों में हुई
  • जिन लोगों में ये तीन जटिलताएँ शुरुआती स्वरूप में थीं, ऐसे बहुत कम लोगों में जटिलताएं और बढ़ीं
  1. EDIC अध्ययन से यह पुष्टि हुई कि ये लाभ पांच वर्ष की अवधि तक बने रहे, यहां तक कि तब भी जब कड़े नियंत्रण वाले कुछ मरीज़ फ़ॉलोअप के दौरान  HbA1c  को बनाए रख सके
  2. कुमामोटो और UKPDS अध्ययन में प्रकार 2 के डायबिटिक्स में समान लाभ पाए गए.
  3. ACCORD, ADVANCE और VADT अध्ययनों में पाया गया कि 7 से कम HbA1c स्तर, माइक्रोवेस्क्युलर जटिलताओं की रोकथाम और उनके बेहतर नियंत्रण से और अधिक संबद्ध थे

मैक्रोवेस्क्युलर जटिलताएं:

  1. DCCT में, कड़े नियंत्रण के साथ CVD ईवेंट के कम जोखिम का रुझान मिला. EDIC अध्ययन के 9-वर्ष के फ़ॉलो अप में, कड़ा नियंत्रण रखने वाले समूह में मानक समूह की तुलना में गैरघातक मायोकार्डिनल इन्फ़ार्क्शकन, (ह्रदयाघात), स्ट्रोक, या CVD मृत्यु के खतरे में 57% कमी पाई गई और हाल ही में यह प्रभाव पिछले कई दशकों से देखा जा रहा है
  2. UKPDS परीक्षण के दौरान, कड़ा नियंत्रण रखने वाले समूह में, CVD ईवेंट (संयुक्त घातक और गैरघातक MI और अचानक मृत्यु) में 16% कमी पाई गई, दस वर्ष की फ़ॉलो अप अवधि में ये लाभ और भी अधिक मिले
  3. ACCORD, ADVANCE और VADT अध्ययन, जो कि अक्सर मौजूदा CVD वाले लंबे समय से चल रही डायबिटीज़ (8-11 वर्ष या अधिक) के मरीज़ों पर किए गए, जिनमें ऐसे जोखिम में कोई कमी नहीं पाई गई

सारांश में

रक्त शर्करा का कड़ा नियंत्रण (HbA1c स्तर 7 % से कम और 6.5% से कम यदि संभव हो) के परिणामस्वरूप, डायबिटिक्स के सभी मरीज़ों में कम माइक्रोवेस्क्युलर जटिलताएं होती हैं. CVD जोखिम कम करने के लिए, डायबिटीज़ के शुरुआती वर्षों में कड़ा नियंत्रण सर्वाधिक लाभकारी होता है

कड़े नियंत्रण का वास्तविक अर्थ क्या है, इस बारे में अधिक जानकारी के लिए, डायबिटीज़ में रक्त शर्करा के अच्छा नियंत्रण का अर्थ क्या है? पढ़ें

साथ ही डायबिटिक्स विशेषज्ञ, रक्त परीक्षण और शारीरिक परीक्षण द्वारा डायबिटीज़ की जटिलताओं का पहले से पता लगाने और उसका उपचार करने और अच्छा नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए डायबिटीज़ के मरीज़ों की लगातार निगरानी की अनुशंसा करते हैं,  डायबेटिक के मरीज़ों के लिए नियमित परीक्षणों की पूर्ण सूची यहाँ प्राप्त करें

देखें :डायबिटीज़ मेलिटस के लिए हमारे संदर्भ