भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं और यह भारतीय जनसंख्या में पहले से ही मृत्यु का दूसरा सबसे मुख्य कारण (CVD के बाद) है. किसी भी भाग में होने वाले किसी भी कैंसर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैंतो आप अपने परिवार में कैंसर के बचाव के लिए या कम से कम उसका पता लगाने के लिए क्या कर सकते हैं

जबकि आप में कैंसर उत्पन्न करने वाले सभी कारकों की सूची लंबी है, अक्सर ऐसे लोगों को भी कैंसर हो जाता है, जिन्हें इसका कोई महत्वपूर्ण जोखिम नहीं होता है. इसलिए, कैंसर से बचाव की एजेंसियों द्वारा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार कैंसर की जांच करना सर्वोत्तम रहता है. अक्सर, यहां तक कि डॉक्टर भी कैंसर की जांच के बारे में परामर्श देने में विफल रहते हैं, इसलिए यह सर्वोत्तम है कि आप स्वयं इस की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले लें!

भारतीय पुरुषों के बीच होने वाले पांच सबसे सामान्य प्रकार के कैंसर होंठ और मुंह (ओरल कैविटी), फेफ़ड़ा, पेट, बड़ी आंत (कोलोरेक्टम) और फ़ेरिंन्क्स (कंठ) के कैंसर हैं. महिलाओं में, गर्भाशय का सर्विक्स, छाती, कोलोरेक्टम, होंठ/ओरल कैविटी और अंडाशय कैंसर के सबसे आम अंग हैं

इन तथ्यों में सबसे ज़्यादा आश्चर्यजनक बात यह है कि फ़ेफ़ड़े, अंडाशय और पेट के कैंसर को छोड़कर यहां सूचीबद्ध अन्य सभी प्रकार के प्रमुख कैंसर का पता मानक जांच परीक्षणों से पहले ही लगाया जा सकता है. पहले से ही निदान होने से ठीक होने की दर काफी बढ़ जाती है और कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु कम हो जाती है. लेकिन भारत में, कैंसर के आधे से अधिक मामलों में उसका पहली बार पता एडवांस स्टेज में ही चलता है

तो जांच परीक्षण क्या हैं? ये परीक्षण ऐसे व्यक्तियों में किए जाते हैं, जिनमें इस बीमारी के कोई भी चिह्न या लक्षण नहीं होते हैं, जिनके लिए परीक्षण किया जा रहा है. इस प्रकार के जांच परीक्षण उस बीमारी का शुरुआती स्थिति में पता लगाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं, जिसने अभी तक मरीज़ों को परेशान भी नहीं किया है. विश्वभर के डॉक्टरों और स्वास्थ्य एजेंसियों के विशेषज्ञ एसोसिएशन इन जांचों की अनुशंसा जन समुदाय या विशेष जोखिम समूहों के लिए करने से पहले डेटा एकत्र करते हैं और इन परीक्षणों की प्रभाव क्षमता का मूल्यांकन करते हैं.

ऐसे सत्यापित जांच परीक्षणों में निम्न शामिल हैं:

  • महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के लिए PAP स्मीयर परीक्षण
  • महिलाओं में स्तन कैंसर के लिए SBE (स्तनों की स्व जांच), CBE (स्तनों की क्लिनिकल जांच) और मैमोग्राफ़ी
  • कोलोन कैंसर के लिए FOBT (फ़ीकल ऑकल्ट बल्ड टेस्ट), सिग्मॉइडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी
  • ओरल कैविटी और होंठ के कैंसर के लिए स्व परीक्षण और क्लिनिकल परीक्षण

कैंसर से बचाव और उसकी जांच के लिए HWI की अनुशंसाएं नीचे दी गई हैं

महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर की जांच

सर्वाइकल कैंसर, भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर है और भारत में हर 8 सेकंड में एक महिला की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर के कारण होती है. PAP स्मीयर के दिशानिर्देश इस प्रकार हैं:

  • सेक्स में सहभागिता करने वाली 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला को हर 3 वर्ष में पैप स्मीयर करवाना चाहिए
  • 30-65 वर्ष की आयु की महिलाओं को आदर्श रूप से हाइब्रिड परीक्षण (पैप स्मीयर+ HPV परीक्षण) करवाना चाहिए और यदि यह सामान्य हो, तो इसे हर 5 वर्ष में दोहराएं. हालांकि हर तीन वर्षों में Pap स्मीयर करवाना भी स्वीकार्य है
  • यहां तक कि वे महिलाएं, जिन्हें HPV वैक्सीन लग गया है, उन्हें भी पैप परीक्षण करवाना चाहिए
  • 65 से अधिक आयु की महिलाओं को अपने डॉक्टर के साथ पैप परीक्षण की आवश्यकता की चर्चा करनी चाहिए
  • ऐसी महिलाओं को, जिनका गर्भाशय निकाल दिया गया है, उनको पैप स्मीयर जांच की आवश्यकता नहीं होती है

महिलाओं के लिए स्तन कैंसर की जांच

  • प्रत्येक माह (माहवारी के बाद) 20 वर्ष या अधिक की महिलाओं को BSE (स्तन का स्व परीक्षण) करना चाहिए, नीचे दी गईं लिंक देखें

http://www.breastcancer.org/symptoms/testing/types/sef_exam/bse_steps

SBE कैसे करें, वीडियो

  • 45-55  वर्ष के बीच की आयु वाली महिलाओं को डॉक्टर से CBE और मैमोग्राफ़ी जांच वार्षिक रूप से करानी चाहिए
  • 55 वर्ष की आयु के बाद, वर्ष में एक बार मैमोग्राम तब तक किया जाना चाहिए, जब तक वे सामान्य नहीं हो जाते
  • जिन महिलाओं का नीचे सूचीबद्ध किए अनुसार इतिहास हो, उन्हें समय से पहले ही मैमोग्राम/MRI और जेनरिक जांच करवाने की आवश्यकता के बारे में अपने डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए:
    • यदि मां, बहन, आंटी या कज़िन को 45 वर्ष की आयु से पहले स्तन कैंसर हुआ हो
    • यदि परिवार के दो सदस्यों को, जिनका संबंध परिवार के एक ही पक्ष से हो, स्तन कैंसर हो
    • एक सदस्य को दो से अधिक प्रकार के स्तन कैंसर हों या अंडाशय के एक से अधिक कैंसर हों
    • परिवार में पुरुष स्तन कैंसर होना
    • अंडाशय, अग्नाशयी, थॉयराइड, एंडोमेट्रियल, किडनी कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, गेस्ट्रिक कैंसर इत्यादि सहित परिवार में तीन से अधिक कैंसर होना

ओवल कैविटी और होठों के कैंसर की जांच

  • ऐसे सभी व्यक्ति जो किसी भी प्रकार के तंबाकू का सेवन करते हैं और/या अल्कोहल पीते हैं, उन्हें हर माह मुंह और मुंह के आसपास स्व परीक्षण करना चाहिएइसे करने का तरीका सीखने के लिए ये लिंक देखें : http://www.sixstepscreening.org/self-exam/ OR http://cancerindia.org.in/cp/index.php/know-about-cancer/oral-cancer#early-detection
  • साथ ही, ऐसे लोगों को नियमित रूप से दांत का परीक्षण (आदर्श रूप से हर छह माह में) करवाना चाहिए, जिसमें आपका दंतचिकित्सक मुंह और मुंह के आसपास की जांच भी करे

भले ही इन परीक्षणों की अनुशंसा उच्चजोखिम वाले लोगों के लिए की जाती है, लेकिन कम जोखिमपूर्ण लक्ष्ण वाले लोगों को भी ओरल कैविटी और लिप कैंसर हो सकते हैं. इसलिए, स्वपरीक्षण की प्रक्रिया हर माह करना हर व्यक्ति के लिए एक अच्छा विचार है

कोलोन कैंसर/कोलोरेक्टल कैंसर के लिए जांच

  • 50 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे पुरुषों और महिलाओं को, जिनके परिवार में कोलोन कैंसर का कोई इतिहास नहीं हो, प्रत्येक समूह में से एक परीक्षण करवाकर कोलोरेक्टल कैंसर की जांच करवानी चाहिए

अपने डॉक्टर के साथ इसकी चर्चा करें

स्टूल परीक्षण

ग्वाइएकआधारित फीकल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट (gFOBT) हर वर्ष

फ़ीकल इम्युनोकेमिकल टेस्ट (FIT) हर वर्ष

स्टूल DNA टेस्ट (sDNA) हर 3 वर्ष में

इन्वेसिव परीक्षण

हर 10 वर्षों में कोलोनोस्कोपी सर्वोत्तम है, अन्यथा निम्न में से कोई एक किया जा सकता है

डबलकंट्रास्ट बेरियम एनिमा हर 5 वर्ष में

CT कोलोनोग्राफ़ी (वर्चुअल कोलोनोस्कोपी) हर 5 वर्षों में

फ़्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी हर 5 वर्ष में​

  • ऐसे पुरुषों और महिलाओं को, जिनके परिवार के नज़दीकी संबंधियों में 60-वर्ष की आयु के पहले या दो या अधिक नज़दीकी संबंधियों में किसी भी आयु में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें 40 वर्ष की आयु से आरंभ करके हर पांच वर्ष में या परिवार के निकट संबंधी में ऐसा मामला सामने आने पर उसकी आयु के 10 वर्ष पहले की आयु में, जो भी पहले हो, कोलोनोस्कोपी ​परीक्षण करवाना चाहिए

प्रोस्टेट कैंसर की जांच:

50 वर्ष की आयु पर आते ही पुरुषों को PSA द्वारा प्रोस्टेट कैंसर की जांच करवाने के गुणदोषों के बारे में चिकित्सक से चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि इसके लाभ स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हैं

ऐसे पुरुष जिनके निकट संबंधियों मे 65 वर्ष की आयु के पहले प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें 45 वर्ष की आयु में इस परीक्षण के बारे में अपने चिकित्सक से चर्चा करनी चाहिए

यदि जांच परीक्षण में असामान्य परिणाम प्राप्त हों, तो क्या करें?

यदि कोई भी असामान्यता आती है, तो अपने चिकित्सक से तुरंत परामर्श करें

जांच को छोड़कर, कैंसर रोकथाम की कार्यनीति के संबंध में HWI की अनुशंसाएं

कैंसर की चेतावनी देने वाले लक्षणों के प्रति सतर्क रहना:

कैंसर की चेतावनी देने वाले ये सात लक्षण इस प्रकार हैं:

  1. बिना किसी कारण के वज़न में कमी और भूख न लगना
  2. मुंह में कोई घाव या जख्म जो 2 सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो या शरीर के किसी भी अन्य भाग में कोई घाव या जख्म जो 3 सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो
  3. शरीर के किसी भी खुले भाग से रक्तस्राव या द्रव/स्राव का होना
  4. निगलने में कठिनाई होना
  5. लंबे समय तक अपचन या मलत्याग की आदतों में बदलाव
  6. लंबे समय तक कफ या कुछ सप्ताह/माह तक स्वर में बदलाव होना
  7. तेज़ी से बढ़ने वाली कोई भी सूजन या किसी मस्से में बदलाव

जीवनशैली में परिवर्तन और जोखिम कम करना

  1. धूम्रपान छोड़ दें. यह कैंसर के जोखिम को कम करने का एकमात्र सबसे प्रभावी चरण है
  2. स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें. अधिक सब्ज़ियां और फल और कम संसाधित भोजन खाएं
  3. टीके लगवाएं. हेपिटाइटिस B के टीके से लिवर के कैंसर से बचाव करने में और HPV से बचाव के टीके से सर्वाइकल और ओरल कैंसर से रक्षा करने में मदद मिल सकती है
  4. अधिक समय तक धूप में रहने से बचें या सनस्क्रीन लगाएं

इस प्रकार, कैंसर को दूर रखने के लिए बहुआयामी कार्यनीति की आवश्यकता होती है, तो ये बदलाव लाएं और ये कदम आज ही उठाएं