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डायबिटीज़ में न केवल ब्लड शुगर के स्तरों को नियंत्रित करने के लिए बल्कि अन्य जोखिमों जैसे शरीर के वज़न और हृदय संबंधी जोखिमों को दूर रखने के लिए आहार प्रबंधन सर्वाधिक महत्वपूर्ण है

डायबिटीज़ से संबंधित विश्व की सभी विशेषज्ञ एजेंसियों ने ( ADA, AACE, IDF और हमारा स्वयं का ICMR) डायबिटीज़ में आहार नियंत्रित करने के संबंध में दिशानिर्देश प्रकाशित किए हैं, जिनका हमने FHI में अपने टाइप 2 डायबिटीज़ आहार योजना को निर्मित करने के लिए विश्लेषण किया है.  प्रीडायबिटीज़ और मेटाबोलिक सिंड्रोम  से पीड़ित लोगों के लिए आवश्यक आहार के बदलाव समान हैं

डायबिटीज़ आहार योजना कैसे बनाएँ

टाइप 2  डायबिटीज़ आहार योजना‘  बनाने के लिए 3 सबसे अधिक महत्वपूर्ण विचारणीय बातें यहाँ दी गई हैं :

  1. ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए कार्बोहाइड्रेट की ली जाने वाली मात्रा का प्रबंधन करना
  2. वज़न कम करने के लिए या स्वास्थ्य के अनुकूल वज़न बनाए रखने के लिए कैलोरी की ली जाने वाली संपूर्ण मात्रा का प्रबंधन करना
  3. CVD (हृदय रोग) के जोखिम को कम करने के लिए बुरी वसा या नमक की ली जाने वाली मात्रा पर नज़र रखना

कार्बोहाइड्रेट की अपनी ली जाने वाली मात्रा का अच्छा प्रबंधन करना

डायबिटिक मरीज़ में, शरीर के लिए आवश्यक इंसुलिन की मात्रा से कम इंसुलिन होता है या कोशिकाएँ इंशुलिन का अच्छी तरह उपयोग नहीं करती हैं. इंसुलिन का सबसे महत्त्वपूण कार्य ब्लड ग्लूकोज़ स्तरों को सामान्य बनाए रखना है, लेकिन डायबिटिक्स ब्लड ग्लूकोज़ स्तरों में इंसुलिन की कम क्रिया के कारण ब्लड ग्लूकोज़ के स्तर सामान्य से अधिक होते हैं

इसलिए, डायबिटीज़ की जटिलताओं से बचाव के लिए या उन्हें टालने के लिए ब्लड ग्लूकोज़ के स्तर सामान्य बनाए रखना सबसे महत्त्वपूर्ण विचारणीय बिंदु है

यह बिंदु, भारतीय लोगों के लिए और भी अधिक प्रासंगिक है क्योंकि हम अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट वाले आहार ग्रहण करते हैं. कोल्ड ड्रिंक्स, डेज़र्ट और प्रोसेस किए गए कार्बोहाइड्रेट के बढ़ते उपभोग ने इस स्थिति को बदतर बना दिया है!

तो क्या करना चाहिए? शुगर, प्रोसेस किए गए कार्बोहाइड्रेट्स छोड़ दें?

नहीं, यदि आपको डायबिटीज़ है, तो आपको सामान्य धारणा के विपरीत शुगर, चावल, आलू या मिठाई पूरी तरह नहीं छोड़नी है!

बल्कि आपको कार्बोहाइड्रेट भोज्य पदार्थ को अच्छी तरह जान लेना है और अत्यधिक शुगर लेवल से बचने के लिए कार्बोहाइड्रेट की अपनी ली जाने वाली मात्रा को नियमित रूप से मॉनिटर करना है. यही वह बात है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग  शामिल होती है; कार्बोहाइड्रेट की समान मात्रा, चाहे वह दानेदार अनाज या टेबल शुगर से प्राप्त हों, भोजनपश्चात ब्लड शुगर को लगभग समान स्तर पर बढ़ा देंगे. आपको अपनी कार्बोहाइड्रेट यूनिट का ट्रैक रखना होगा, जिसे आप ग्रहण करते हैं.

तो यदि आप कभीकभी केवल शुगर या मिठाई लेना चाहें, तो यह सुनिश्चित करें कि आप इन मिठाइयों से सेहतपूर्ण कार्बोहाइड्रेट को प्रतिस्थापित रहे हैं और उसमें और अधिक जोड़ नहीं रहे हैं

वज़न कम करने या सेहतपूर्ण वज़न बनाए रखने के लिए कैलोरी की ली जाने वाली संपूर्ण मात्रा का नियंत्रण करे

शरीर के अतिरिक्त वज़न को कम करने से न केवल ब्लड शुगर के लेवल्स को नियंत्रित करने में मदद मिलती है बल्कि हृदय रोगों के और अन्य बहुत सी बीमारियों के आपके जोखिम को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है

आपके शरीर के मौजूदा वज़न के 3-5% को कम करने के परिणामस्वरूप ब्लडशुगर के बेहतर स्तर प्राप्त होंगे, बल्कि उसे 10% तक कम करने के परिणामस्वरूप बेहतर ब्लड लिपिड प्रोफ़ाइल और हृदय रोग का कम जोखिम होगा

अधिक जानकारी के लिए, डायबिटीज़ के लिए वज़न कम करना पर जाएं 

बुरीवसाओं और नमक की ली जाने वाली मात्रा को नियंत्रित रखें

CVD की जटिलताएँ (जिनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पैर का गैंगरीन शामिल है) डायबिटीज़ में मौतों का सबसे बड़ा कारण है

इसलिए, CVD के लिए जोखिम कारकों के प्रबंधन के लिए आहार संबंधी बदलाव, डायबिटिक मरीज़ों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैंइन बदलावों में आपके आहार में नमक और बुरीवसाओं की ली जाने वाली मात्रा को नियंत्रित करना शामिल हैं. डायबिटिक मरीज़ों को सामान्य लोगों की तुलना में वुरी वसाओं और नमक की कम मात्रा ग्रहण करना चाहिए

लेकिन क्या आपको ज़ीरो ऑइल कुकिंग या ऑइल के अत्यधिक प्रतिबंधों को अपनाना चाहिए? नहीं! भारत में, डॉक्टर और डायटीशियन डायबिटिक मरीज़ों को अक्सर कम वसा वालाआहार लेने की सलाह देते हैं. लेकिन यदि इसे अत्यधिक स्तर पर किया जाता है, तो यह असल में नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि  औसतन भारतीय लोगअपने आहार में बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट और कम प्रोटीन और वसा लेते हैं! (अधिक जानकारी के लिए पढ़ेंभारतीय आहार: ‘गुण और दोष)

इसके बजाय वनस्पति, फ़ुल क्रीम वाले दूध, मक्खन, घी और पूर्ण वसा वाले मीट की अत्यधिक मात्रा में मौजूद बुरीवसाओं (स्नैक आइटम और रेस्तरां/फ़ास्ट फ़ूड वाले भोज्य पदार्थों इत्यादि में मिलने वाली) को अच्छे वनस्पति तेलों (जैसे ओलिव, कैनोला, राइस ब्रान इत्यादि लेकिन कोकोनट और पाम ऑइल नहीं) से प्रतिस्थापित करना आवश्यक है.

इन जोखिम कारकों का प्रबंधन करने के बारे में अधिक जानने के लिए डायबिटीज़ में हृदय रोग के जोखिम कारकों का आहार प्रबंधन पर जाएं

FHI ने एक डायबिटिक आहार चार्ट कैल्क्युलेटर डिज़ाइन किया है, जिसका उपयोग आप स्वयं की डायबिटिक आहार योजना बनाने के लिए कर सकते हैं. इसमें वज़न कम करने का आहारका विकल्प भी मौजूद है !

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