डायबिटीज़ का उपचार, रक्तशर्करा को सामान्य सीमा में रखने पर केंद्रित है क्योंकि शरीर की चयापचयी प्रक्रिया में डायबिटीज़ के कारण होने वाली सर्वाधिक महत्वपूर्ण अव्यवस्था यही है. लेकिन डायबिटीज़ के उपचार में और भी बहुत कुछ किया जाता है, इसकी जानकारी नीचे देखें

यह शरीर की चयापचयी व्यवस्था का रोग है जिसके कारण CVD (कार्डियो वेस्क्युलर रोग) का काफ़ी उच्च जोखिम होता है, जिसके परिणामस्वरूप जटिलताएं जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक इत्यादि हो सकते हैं. डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को अधिकांशतः मेटाबोलिक सिंड्रोम भी होता है, जो कि अधिकांशतः सामान्य रक्त चाप, कोलेस्ट्रॉल और शरीर के भार से अधिक होता है

इसलिए डायबिटीज़ के अच्छे प्रबंधन के लिए न केवल रक्त शर्करा के नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए बल्कि जटिलताओं का समय पर पता लगाने और साथ में होने वाली सामान्य स्वास्थ्यसमस्याओं के प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहिए

डायबिटीज़ के उपचार की ABC

डायबिटीज़ के सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण लक्ष्य को डायबिटीज़ के ‘ABC’ के रूप में सारांशित किया जाता है:

A:  रक्त शर्करा के नियंत्रण को इंगित करने वाले HbA1c स्तर

B:  रक्तचाप

C:  रक्त कोलेस्ट्रॉल स्तर

हालांकि, यहां तक कि यह सूची भी अपूर्ण है क्योंकि इसमें डायबिटीज़ की जटिलताओं और वैक्सिनेशन इत्यादि जैसे कारकों का पता लगाना और उसकी निगरानी करना शामिल नहीं है.

नीचे दी गई तालिका, रक्त शर्करा के नियंत्रण के परे डायबिटीज़ के संपूर्ण अच्छे नियंत्रण के लिए सभी पैरामीटरों का सारांश प्रस्तुत करती है

डायबिटीज़ से पीड़ित व्यक्ति में जोखिम के कारकों के नियंत्रण के लिए परीक्षण और लक्ष्य
 परीक्षण कौन सा स्तर यह इंगित करता है

इष्टतम नियंत्रण

कौन सा स्तर यह इंगित करता है

अच्छा नियंत्रण

यह परीक्षण कब/कितनी बार किया जाना चाहिए
HbA1c लैब परीक्षण अधिकांश लोगों के लिए <6.5%, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनमें शुरुआती आयु में इसका निदान हुआ है और जिनमें बीमारी आरंभिक अवस्था में है <7%,

  • ऐसे लोगों में, जिनमें बीमारी पुरानी हो चुकी है
  • स्वास्थ्यसंबंधी अन्य स्थितियों वाले लोगों में
  • ऐसे लोग जिनमें अधिक नियंत्रण का लक्ष्य करने पर हाइपोग्लाइसीमिया की बारबार आवृत्ति होती है
1. निदान होने पर

2. फ़ॉलो अप में:

  • यदि लक्ष्य स्तर प्राप्त हो जाता है: छः माह में एक बार
  • यदि नहीं तो: तीन माह में एक बार
रक्तशर्करा खाली पेट/भोजन करने के पहले : <110 mg/dL

भोजन करने के पश्चात/PP <140 भोजन करने के दो घंटे बाद और <180 भोजन शुरू करने के 1-2 घंटे पहले

खाली पेट/भोजन करने के पहले : 80-130

PP: < 160 दो घंटों पर

निदान:

खाली पेट और PP रक्त स्तरों का प्रयोगशाला परीक्षण

फ़ॉलो अप के लिए:

SMBG मॉनीटरिंग नियमित रूप से की जानी चाहिए, जांच करें

SMBG

विवरणों के लिए

यदि HbA1c का स्तर लक्षित स्तर से अधिक होता है, तो आपका चिकित्सक उपचार को समायोजित करने के लिए प्रयोगशाला जांचों का सुझाव दे सकता है

रक्तचाप < 130/85 < 140/90
  • यदि लक्ष्य स्तर प्राप्त हो जाता है: छः माह में कम से कम एक बार,
  • यदि नहीं, तो : अधिक आवृत्ति पर, चिकित्सक की सलाह के अनुसार
रक्त लिपिड स्तर
  अच्छे नियंत्रण के लिए लक्ष्य मॉनीटरिंग की आवृत्ति
LDL कोलेस्ट्रॉल LDL लक्ष्य आपके ‘हृदय के जोखिम स्तर पर निर्भर हैं

यदि जोखिम अधिक हो,  तो LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर <70 mg/dL होता है

भले ही जोखिम कम या मध्यम हो, LDL लक्ष्य <100 mg/dL माना जाना चाहिए

स्टेटिन के साथ दवा थेरेपी पर विचार किया जाना चाहिए यदि आपकी आयु 40 वर्ष से अधिक है, अपने चिकित्सक से चर्चा करें

  • यदि लक्ष्य स्तर प्राप्त हो जाता है: छः माह में या वर्ष में एक बार
  • यदि नहीं तो: तीन माह में एक बार
HDL कोलेस्ट्रॉल महिलाओं में > 50 और पुरुषों में >40, भोजन और जीवनशैली का इस पर बहुत अधिक प्रभाव होता है
ट्रायग्लिसराइड्स <150 mg/dL, भोजन और जीवनशैली का इस पर बहुत अधिक प्रभाव होता है
वज़न शरीर के वज़न का कम से कम 5-10% वज़न कम करें यदि आपका वज़न सामान्य वज़न से अधिक है यदि आपका वज़न, सामान्य सीमा के अंदर है, तो माह में एक बार

यदि आपका वज़न सामान्य वज़न से अधिक है/ आपको मोटापा है और आप वज़न कम करने का प्रयास कर रहे हैं, तो सप्ताह में न्यूनतम एक बार या आदर्श रूप से हर रोज़

धूम्रपान धूम्रपान कम करना जितनी जल्दी हो सके !
माइक्रोवेस्क्युलर जटिलताओं के लिए जांच
  1. डायबिटिक नेफ़्रोपैथी (किडनी की बीमारी) के लिए जांच:

eGFR के साथ सीरम क्रेटिनाइन

माइक्रोएल्ब्युमिनुरिया/यूरिन एल्ब्युमिन क्रेटीनाइन अनुपात

  •  eGFR: शरीर की सतह के क्षेत्रफल का >90 ml/mim/1.73m^2
  • माइक्रोएल्ब्युमिनुरिया(UACR): <30 मिग्रा/ग्राम
  • निदान हो जाने पर और इसके बाद वार्षिक रूप से, जब तक कि स्तरों में कोई अव्यवस्था नहीं हो
  • इसके बाद, चिकित्सक द्वारा निर्देशित किए गए अनुसार
  1. डायबेटिक रेटिनोपैथी के लिए आंखों की जांच
आंखों को डायलेट करने और आंखों के विशेषज्ञ द्वारा आंखों की जांच सहित आंखों की विस्तृत जांच की जानी चाहिए
  • निदान होने पर परीक्षण, यदि कोई रेटिनोपैथी नहीं की जाती है; इसके बाद द्विवार्षिक
  • यदि रेटिनोपैथी मौजूद है: कम से कम वार्षिक या चिकित्सक द्वारा निर्देशित किए जाने पर इससे अधिक बार
  1. डायबेटिक न्युरोपैथी के लिए जांच:विशेष रूप से डायबेटिक फ़ुट
  1. पेरिफ़ेरल न्युरोपैथी: पैर का संपूर्ण निरीक्षण
चिकित्सक द्वारा पूर्ण न्युरोपैथी के लिए जांच की जानी चाहिए, जिसमें निम्न शामिल होना चाहिए

  • पैर की संरचना और डेफ़ोमिटी
  • त्वचा की पूर्णता (कोई घाव/फोड़े, कॉल्युसस इत्यादि न हो)
  • तापमान/गर्मी
  • पैर के स्पंदन
  • निदान करने पर और फिर वार्षिक रूप से जब तक कि परीक्षण सामान्य न हों
  • अन्यथा ज़्यादा बार (यदि चिकित्सक द्वारा ऐसा करने के लिए निर्देशित किया जाए)
  1. कार्दिएक ऑटोनोमिक न्युरोपैथी
  • ह्रदय की धड़कन में परिवर्तनीयता
  • लेटने से लेकर खड़े होने की स्थिति तक रक्त चाप में परिवर्तन
  • निदान करने पर और फिर वार्षिक रूप से जब तक कि परीक्षण सामान्य न हों
  • अन्यथा ज़्यादा बार (यदि चिकित्सक द्वारा ऐसा करने के लिए निर्देशित किया जाए)
  1. अन्य न्युरोपैथी
  • इरेक्टाइल में खराबी
  • डायरिया/कब्ज़
  • पेट हमेशा भरा हुआ महसूस होना (गेस्ट्रोपेरेसिस)
  • योनिक शुष्कता
  • मूत्र संबंधी शिकायतें (पेशाब एकत्र होना, बारबार पेशाब आना, रात के समय बारबार पेशाब होना, असंयम)
यदि आपको इनमें से कोई भी है, तो इसकी चर्चा अपने चिकित्सक से करें
CVD के लिए जांच

(कार्डियो वेस्क्युलर बीमारियां)

यदि आपकी आयु 40 वर्ष से अधिक है बेसलाइन के रूप में ECG किया जाना चाहिए

इसके बाद, चिकित्सक द्वारा निर्देशित किए गए अनुसार

 

यदि आपको इनकी शिकायतें हैं:

  1. कुछ दूरी तक चलने पर पैरों या पंजे में दर्द हो, जो आराम करने पर ठीक हो जाए
  2. पेट में तेज़ दर्द उठना, जिसका कोई भी कारण निर्धारित नहीं हुआ हो
  3. देखने की क्षमता में अचानक कमी होना, मुंह का लटक जाना, अंगों में शक्ति कम हो जाना या बारबार बदलने वाला व्यवहार जो अपने आप ठीक हो जाता है

या

डायबेटिक नेफ़्रोपैथी या न्युरोपैथी का निदान होना

ECG किया जाना चाहिए और अन्य परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है, अपने चिकित्सक से परामर्श करें
यदि आपमें यह लक्षण नहीं हों ह्रदय रोग के लिए जोखिम का मूल्यांकनकरवाएं और इसके परिणामों के आधार पर आपको अन्य सलाह प्राप्त होगी
वैक्सिनेशन डायबिटीज़ के कारण प्रतिरोधक प्रतिक्रिया खराब हो सकती है और संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है, आपको इनमें से कोई टीका लेना चाहिए या नहीं इस बारे में अपने चिकित्सक से चर्चा करने के लिए नीचे दी गई सलाह का उपयोग करें

  1. न्युमोकॉकल वैक्सिन: PPSV 23, या यदि आपकी आयु 65 वर्ष से अधिक है, तो PCV23 और PPSV
  2. Td वैक्सिन: डायबिटीज़ से पीड़ित सभी वयस्कों को हर 10 वर्षों में एक बार Td बूस्टर
  3. हेपेटाइटिस B वैक्सिनडायबिटीज़ से पीड़ित 20-59 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति के लिए, यदि पहले नहीं लिया गया हो
  4. इन्फ़्लुएंज़ावार्षिक रूप से
साइकोसोशल आंकलन
  • डायबिटीज़ से पीड़ित लगभग 20–25% लोग अवसाद से प्रभावित होते हैं और उनमें ह्रदयाघात का और यहां तक कि मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है
  • डायबिटीज़ से संबंधी परेशानियां/चिंता 18–45% मरीज़ों को प्रभावित करती हैं और इससे शर्करा के स्तरों का अच्छा नियंत्रण प्रभावित होता है
  • डायबिटीज़ से पीड़ित व्यक्तियों में भोजन संबंधी विकार भी सामान्यतः पाए जाते हैं
इनके लिए एक जांच परीक्षण करवाएं और यदि आपको चिंता हो, तो अपने चिकित्सक से परामर्श करें
बच्चे को जन्म देने वाले आयुसमूह वाली महिलाएं
  • अनियंत्रित डायबिटीज़ से बच्चे में विकृति आने का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए डायबिटीज़ से पीड़ित ऐसी महिलाओं को, जो कि बच्चे को जन्म देना चाहती हैं, पहले रक्तशर्करा//HbA1c के स्तरों के पर्याप्त नियंत्रण का लक्ष्य बनाना चाहिए
यदि आप बच्चे को जन्म देना चाहती हैं, तो अपने चिकित्सक से चर्चा करें

देखें: डायबिटीज़ मेलिटस के लिए हमारे संदर्भ